चे ग्वेरा की टी-शर्ट फैशन बन गई, लेकिन बिस्मिल-अशफाकउल्ला ऑउट ऑफ फैशन क्यों...? - News Adda India

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चे ग्वेरा की टी-शर्ट फैशन बन गई, लेकिन बिस्मिल-अशफाकउल्ला ऑउट ऑफ फैशन क्यों...?



 गोरी चमड़ी और विदेशी संस्कृति को श्रेष्ठ मानने की प्रवृति अनजाने में ही सही लेकिन आज भी हमारे दिल में मौजूद है. वरना क्यों हमारे देश के युवा फैशन के नाम पर चे ग्वेरा और फिदेल कास्त्रो जैसे विदेशी क्रांतिकारियों की तस्वीरों वाले परिधान बड़े चाव से पहनकर घूमते हैं. जेएनयू जैसे तथाकथित प्रगतिशील संस्थानों में ऐसे लोगों की तादाद बहुतायत में है. लेकिन हमारे देशज क्रांतिक्रारी इतिहास की किताबों में ही सिमटकर रह गए हैं. शहीद भगतसिंह जैसे चर्चित क्रांतिकारियों की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहने इक्का-दुक्का लोग मिल भी जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी खुदीराम बोस, राजगुरू, बटुकेश्वर दत्त, सुखदेव, यतीन्द्रनाथ दास, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां, मदनलाल ढींगरा, सूर्य सेन, शिव वर्मा जैसे किसी क्रांतिकारी की टी-शर्ट पहने किसी व्यक्ति को देखा है.


विदेशी क्रांतिकारी चे ग्वेरा की टी-शर्ट भारत में फैशन में है, लेकिन देशज क्रांतिकारी भुला दिए गए.

विदेशी क्रांतिकारी चे ग्वेरा की टी-शर्ट भारत में फैशन में है, लेकिन देशज क्रांतिकारी भुला दिए गए.

यहां सवाल केवल क्रांतिकारियों की तस्वीरों वाली पोशाक पहनने का नहीं है, बल्कि अपने देशज नायकों को भुलाकर अन्यन को सिर पर चढ़ाने का है. दुर्भाग्य की गैरों पर करम अपनों पर सितम की ये प्रवृत्ति हम अपनी अगली पीढ़ी में भी स्थानांतरित कर रहे हैं. इम्पोर्टेट चीजों के लिए विशेष लगाव के साथ पली-बढ़ी ये पीढ़ी जितनी जल्द इस तथ्य से अवगत हो जाए तो अच्छा है. वरना, गुणवत्ता वाले विदेशी उत्पात के नाम पर घटिया चीनी सामान ही हमारे हाथ आता रहेगा.

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