रणवीर सिंह रावत - एक ऐसा नेता जिसने खुद को अपनी निष्ठा से किया प्रमाणित - News Adda India

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रणवीर सिंह रावत - एक ऐसा नेता जिसने खुद को अपनी निष्ठा से किया प्रमाणित

रणवीर सिंह रावत मध्यप्रदेश बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाब के जमीनी प्रतीक


-एक ऐसा नेता जिसने खुद को अपनी निष्ठा से किया प्रमाणित 

शिवपुरी।।
सूरत से सुदर्शन औऱ संवाद में सहज सौम्य रणवीरसिंह रावत को कभी किसी ने गुस्सा होते नहीं देखा है।अपने -पराये सियासी विरोधियों को भी वह समभाव से सरल औऱ सादगीपसन्द लाइफस्टाइल से अपना बनाने में सिद्धहस्त है।वे बहुत ही कम बोलते है और यही सियासत की धैर्यवान परिभाषा है जिसे मप्र बीजेपी के नए महामंत्री धारण करते है।रणवीर सिंह मप्र में पार्टी के पीढ़ीगत बदलाब का प्रतीक भी है जो श्री बीड़ी शर्मा के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में आलाकमान ने सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।इसका आशय यही है कि मौजूदा पीढ़ी के बाद मप्र में बीजेपी जिन लोगों को भविष्य का चेहरा बनाएगी वह 'टीम बीड़ी' को देखकर समझा जाना चाहिये। हरिशंकर खटीक,कविता पाटीदार,भगवान दास सबनानी,के नाम असल में एक बड़ा संगठनात्मक सन्देश भी है।
बेशक रणवीर सिंह रावत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर के निजी तौर पर भरोसेमंद नेता है लेकिन उनकी काबिलियत केवल इतनी भर नही है।वे 1998 से पार्टी संगठन के एक मजबूत औऱ अनुशासित कैडर का प्रतिनिधित्व भी करते है।मौजूदा सियासी आवश्यकता के हर फन में वह शालीनता से फिट बैठते है।1998 में करैरा से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा जीतने वाले रणवीरसिंह ने 2003 में मिली चुनावी शिकस्त औऱ 2008 में करैरा के अनुसूचित जाति को आरक्षित होने के घटनाक्रम को एक अवसर में बदलने की केस स्टडी भी बनाया है।अक्सर स्थानीय नेता खासकर जिनका कोई पारिवारिक सियासी बैकग्राउंड नही होता है वे इन हालातों में सियासी रूप से अलग थलग पड़ जाते है।रणवीर सिंह ने चुनावी राजनीति के दरवाजे बंद होने के बाद खुद को संगठन की राजनीतिक गतिविधियों के लिए पूरी निष्ठा के साथ समर्पित कर दिया।नतीजतन आज पार्टी ने उन्हें अपने दूसरे सबसे  महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी देकर यही संदेश देने की कोशिश की है कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए बीजेपी आज भी सबसे बेहतरीन राजनीतिक दल और मंच है।यह भी तथ्य है कि श्री रावत को मप्र के नेतृत्व ने भी भरपूर अवसर दिया है खासकर केंद्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए एक अभिभावक की भूमिका निभाई लेकिन समानन्तर रूप से श्री रावत ने भी पार्टी के भरोसे को कमजोर नही होने दिया।करीब 7 साल तक पार्टी के जिलाध्यक्ष ,फिर प्रदेश मंत्री,बीज विकास निगम में उपाध्यक्ष,मप्र किसान मोर्चे के अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जबाबदेही को रणवीरसिंह ने पूरी शिद्द्त से निभाया है।पार्टी ने जब भी किसी चुनावी क्षेत्र में उन्हें भेजा वहां पूरा पराक्रम झोंक कर पार्टी के लिए उपलब्धियां हासिल की।प्रदेश मंत्री और किसान मोर्चे के मुखिया के तौर पर प्रदेश के लगभग सभी मण्डलों में प्रवास करने वाले वह अकेले मोर्चा संगठन प्रमुख कहे जा सकते है।2014  में बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर उतरे श्री नरेन्द्र सिंह तोमर के लोकसभा चुनाव में जब माहौल सब दूर प्रतिकूल नजर आ रहा था रणवीर सिंह ने करैरा में पार्टी को रिकार्ड जीत दर्ज कराने में निर्णायक भूमिका का निर्वहन किया।ऐसे ही तमाम अवसर पर वह पार्टी के लिए संकटमोचक साबित हुए है।2018 में वह भितरवार विधानसभा से टिकट के दावेदार थे लेकिन पार्टी ने जब पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा को वहां से उतारने का निर्णय लिया तो रणवीरसिंह अनूप जी के प्रचार में पूरी निष्ठा से जुटे रहे।ऐसे बीसियों अवसरों पर प्रमाणित हो चुके श्रीरावत को पार्टी ने प्रदेश का महामंत्री बनाकर अपने कैडर को भी दूरदर्शितापूर्ण सन्देश दे दिया है।
रणवीरसिंह की खासियत यह है कि वह बगैर शोर शराबे औऱ प्रचार के अपना काम करने में भरोसा रखते है।दूरदराज के क्षेत्रों में वह बगैर सुविधाओं के भी खुद को एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में खपा देते है।विजयपुर नगरपंचायत के चुनाव के दौरान वह कई दिन तक एक कार्यकर्ता के छोटे से घर के बाहर प्रदेश मंत्री होने के बाबजूद खाट पर सोते थे।किसी भी छोटे या बड़े पार्टी आयोजन को लेकर उन्हें सफलतापूर्वक संपन्न होने तक चिंतित होकर जूटे रहना उनकी खासियत भी है और समर्पण की निशानी भी।
रणवीरसिंह के बारे में कहा जा सकता है कि वे बीजेपी के फॉर्मेट में फिट नेता है।वे कोर संघ कैडर से नही आते है लेकिन उनकी कार्यपद्धति बिल्कुल संघ जैसी अनुशासित औऱ सुव्यवस्थित है।वह अपने से उम्र में छोटे कार्यकर्ताओ के लिए भी प्रिय नेता इसीलिए है क्योंकि उनके आभामण्डल में अहंकार या एक्सक्लुसिव तत्व अभी तक प्रवेश नही कर पाया है,यही गुण उनके विरोधियों को भी सीधी प्रतिक्रिया से रोकने पर विवश कर देता है।वह मप्र में बीजेपी के ओबीसी फैक्टर को भी पूरा करने वाले  ऐसे जमीनी नेता है जो पिछले 20 साल में अनुशासन,समर्पण,औऱ जमीनी संघर्ष से तप कर खड़े हुए है।
सार्वजनिक जीवन में संभाषण की कला उनसे सीखी जा सकती है।यह ध्यान रखना चाहिये कि रणवीरसिंह रावत एक साधारण किसान परिवार से आते है जिनके घर मे उनसे पहले कभी कोई सियासत में नही रहा है।उनके गांव तक पहुँचने में भी कभी डर लगता था क्योंकि वहां न रास्ता था न कोई विकास इसलिए एक ठेठ ग्रामीण वातावरण से निकलकर प्रदेश की सियासत में उनकी धमक निजी रुप से भी प्रेरणादायक है।बीजेपी नेतृत्व की इस खासियत को भी दाद देनी होगी जिसने दो दशक में रणवीरसिंह जैसे नेताओं को गढ़ने का काम किया है।
करीब 18 साल पहले केंद्रीय मंत्री  श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक अनऔपचारिक चर्चा में कहा था कि "वह रणवीरसिंह में भविष्य का नेता देख रहे है"
अपने आप मे संगठनशास्त्र  श्री नरेंद्र सिंह तोमर की दूरदृष्टि भी रणवीरसिंह रावत के उत्कर्ष में आज प्रमाणित हो रही है।

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