स्टेकहोल्डर्स जेजे एक्ट के प्रति अतिरेक जबाबदेही के साथ काम करें:अस्थाना - News Adda India

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स्टेकहोल्डर्स जेजे एक्ट के प्रति अतिरेक जबाबदेही के साथ काम करें:अस्थाना


- बेहद संवेदनशील पृष्ठभूमि पर बना है नया कानून:पांडे
- सीसीएफ की ई संगोष्ठी सम्पन्न

शिवपुरी।
किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुप्रयोग सभी स्टेक होल्डर्स को बहुत ही संजीदगी के साथ करना चाहिए।यह अधिनियम अभी सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर विकासशील दौर में है क्योंकि बाल सरंक्षण की मौजूदा अवधारणा का विधिक पक्ष आज भी अनुप्रयोग के मोर्चे पर सरलता और सहजता के धरातल पर नही खड़ा है।सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कानून विकासशील मुल्कों में समय के साथ साथ लोकव्यवहार औऱ व्यवस्था में स्थापित होते है।इसलिए बाल कल्याण समितियों एवं जेजेबी जैसी सरंचनाओं को अपनी जबाबदेही को अतिरेक अनुपात में समझने की जरूरत है।यह बात आज प्रसिद्ध बाल अधिकार कार्यकर्ता एवं विधि विशेषज्ञ श्री ए के अस्थाना ने चाइल्ड कन्जर्वेशन फाउंडेशन की 7 वी ई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।इस संगोष्ठी को मप्र उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विजय कुमार पांडे ने भी संबोधित किया।सगोष्ठी में मप्र,छत्तीसगढ़,हरियाणा,चंडीगढ़,झारखंड,दिल्ली,यूपी के सीडब्ल्यूसी,जेजेबी,एवं चाइल्डलाइन से जुड़े सदस्यों ने भागीदारी की।
श्री अस्थाना ने बताया कि आईपीसी या दूसरे कानूनों की तरह किशोर न्याय अधिनियम को लोकप्रिय होने में कुछ समय लगना स्वाभाविक है क्योंकि भारत जैसे विकासशील समाज मे वैश्विक घोषणाओं से संबद्ध कानून एक सतत सामाजिक प्रयासों से ही लोकप्रिय हो पाते है।उन्होंने सीडब्ल्यूसी जेजेबी के सदस्यों से आग्रह किया कि वह अपने विहित दायित्व के साथ इस कानून को मैदानी स्तर पर आम प्रचलन का हिस्सा बनाने के लिए भी काम करें।श्री अस्थाना ने बताया कि अभी सीडब्ल्यूसी के आदेश मानक परिचालन प्रविधि के अनुरूप नहीं होते है इसलिए प्रयास इस बात के होने चाहिए कि सभी सदस्य  सहसबन्धित नियम उपनियम का गहराई से अध्ययन करें।ऐसा होने पर समितियों के आदेश प्रभावी और परिणामोन्मुखी होंगे।
जबलपुर हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विजय शंकर पांडे ने आईपीसी,सीआरपीसी,एवं जेजे एक्ट के अनुप्रयोग एवं विधिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि कैसे ये कानून बाल सरंक्षण एवं पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।श्री पांडे ने भी इस बात पर जोर दिया कि बाल अधिकार के लिए काम करने वाले सभी गैर सरकारी लोगों और संस्थाओं को जेजे एक्ट की बुनियादी सरंचना औऱ प्रावधान जुबान पर याद होने चाहिये।उन्होंने आईपीसी के प्रावधानों एवं जेजे एक्ट के बुनियादी अंतर औऱ प्रक्रिया को लेकर भी संगोष्ठी में जुड़े लोगों का उपयोगी मार्गदर्शन किया।रेग्युलर कोर्ट करवाई औऱ जुबेनाइल मामलों की करवाई को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण सावधानियों का जिक्र करते हुए कहा कि नया जेजे एक्ट एक संवेदनशील दुरर्दष्टि औऱ समावेशी धरातल पर बनाया गया है इसलिए इससे संबद्ध स्टेक होल्डर्स को इस बुनियादी सोच को आगे रखकर कार्य करना चाहिये।
ई संगोष्ठी का संचालन चाइल्ड कन्जर्वेशन फाउंडेशन के सचिव डॉ कृपाशंकर चौबे ने भोपाल से किया।आभार प्रदर्शन अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा ने व्यक्त किया।ओपन सत्र में दोनों विषय विशेषज्ञों ने देश भर से जुड़े प्रतिभागियों के प्रश्नों के जबाब दिए।

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