निराशा ने कई महिलाओं का जीवन बदला, रोजगार से जोड़ा और बनाया आत्मनिर्भर - News Adda India

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निराशा ने कई महिलाओं का जीवन बदला, रोजगार से जोड़ा और बनाया आत्मनिर्भर



- निराशा नामक महिला के जीवन की सफलता की कहानी
- पहले खुद आत्मनिर्भर बनी महिला निराशा, फिर दूसरी महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़ा किया

शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पिछोर की रूपेपुर गांव की महिला निराशा राजपूत की आत्मनिर्भर बनने की कहानी ने सबको प्रभावित किया है। महिला निराशा आर्थिक रूप से कमजोर थी उसने मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन के समूह से जुड़ पहले खुद को आत्मनिर्भर बनाया और उसके बाद कई महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उनको अपने पैरों पर खड़ा किया है। महिला निराशा के इस तरह से आत्मनिर्भर बनने की कहानी से सीएम शिवराज सिंह चौहान इतने प्रभावित हुए हैं कि इनकी सफलता की कहानी को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताएंगे कि महिला निराशा किस तहर से आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा कर रही है। पिछले दिनों वीडियो कॉन्फेंसिंग के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान तक निराशा नामक महिला के आत्मनिर्भर बनने की कहानी से बहुत प्रभावित हुए है।

खुद आत्मनिर्भर बने दूसरी महिलाओं को रोजगार से जोड़ा-
शिवपुरी जिले की पिछोर की रूपेपुर गांव की रहने वाली महिला निराशा राजपूत पहले खेती किसानी का ही काम गांव में करती थीं लेकिन मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रारंभिक ग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी कार्यक्रम) से जुड़कर महिलाओं के समूह बनाए और इन समूहों की महिलाओं को खुद के उद्यम खुलवाने के लिए प्रेरित किया। महिला निराशा राजपूत ने नेतृत्वशीलता का परिचय दिया और भी गांव की कई महिलाओं को एक साथ जोड़ा। इस तरह से महिला निराशा ने इस एसवीईपी कार्यक्रम के तहत खुद प्रशिक्षण प्राप्त किया और दूसरे महिलाओं को भी प्रशिक्षण से जोड़कर छोटे-छोट उद्यम खुलवा कर उन्हें रोजगार दिलाया। इस तरह से शिवपुरी जिले के पिछोर में एसवीईपी कार्यक्रम के तहत इस समय 800 से ज्यादा छोटे-बड़े उद्यम संचालित हैं। जिनमें कई महिलाएं साड़ी बेचने का काम, मनिहारी, जनरल स्टोर, फोटोकॉपी व कम्प्यूटर सेंटर आदि संचालित कर रोजगार पा रही हैं। एक महिला इस तरह से 5 से 10 हजार तक कमा रही हैं। इसके अलावा महिला निराशा खुद 10 से 15 हजार रुपए कमा लेती हैं।

पहले खेती करतीं थीं महिलाएं आज खुद का रोजगार-
महिला निराशा राजपूत ने बताया कि मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने खुद तो रोजगार पाया साथ ही अन्य महिलाओं को विभिन्न उद्यम खुलवाकर उन्हें रोजगार से जोड़ा है। महिला पार्वती, आशा लोधी और बबीता लोधी ने बताया कि मुझे निराशा दीदी ने खुद का व्यवसाय करने के लिए प्रेरित किया। पहले मैं खेती किसानी का काम करती थी लेकिन अब मैं खुद की साड़ी की दुकान करती हूं। इससे मुझे अच्छी आमदनी होती है। मप्र ग्रामीण आजीविका समूह की एसवीईपी प्रोजेक्ट की ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर अनुपमा ने बताया कि पिछोर ब्लॉक में वर्ष 2018 में  एसवीईपी प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट में महिलाओं ने छोटे-छोटे उद्यम खोले और इस समय 800 उद्यम खुल चुके हैं। मप्र ग्रामीण आजीविका समूह के जिला प्रबंधक अरविंद भार्गव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो मंशा है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए उसी मिशन पर हम काम कर रहे हैं। इस एसवीईपी प्रोजेक्ट से जुड़कर कई महिलाओं ने अपने उद्यम शुरू किए।


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