Mobile - महंगे होंगे मोबाइल फोन, GST दर 12 से बढ़कर हुई 18 फीसदी - News Adda India

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Mobile - महंगे होंगे मोबाइल फोन, GST दर 12 से बढ़कर हुई 18 फीसदी



जीएसटी परिषद ने मोबाइल फोन पर माल एवं सेवाकर (जीएसटी) दर को 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है। विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) सेवाओं पर यह दर घटाकर पांच प्रतिशत और हस्तनिर्मित तथा मशीन से तैयार माचिस पर जीएसटी दर को तर्कसंगत बनाते हुए 12 प्रतिशत पर ला दिया गया। ये नई दरें एक अप्रैल 2020 से लागू होंगी।

मुखौटा कंपनियां बनाकर उनके माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी पर लगाम कसने के लिए माल एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद ने नई पंजीकृत इकाइयों को आईटीसी जारी करने से पहले उनके प्रतिष्ठानों और उनके वित्तीय लेनदेन की जानकारी लिए जाने का फैसला किया है। बैंकों से भी सूचना रिटर्न प्राप्त करने पर जोर रहेगा।
मोबाइल उद्योग के जानकारों का कहना है कि इस कदम से दाम पर असर पड़ेगा। विशेषकर ऐसे समय जब कोरोना वायरस की वजह से इलेक्ट्रानिक आपूर्ति श्रंखला अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, दाम बढ़ने का मतलब होगा ग्राहकों का एक तबका पुराने हैंडसेट खरीदना पसंद करेगा या फिर ग्रे बाजार की तरफ रुख कर सकता है।
माल एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद की शनिवार (14 मार्च) को यहां हुई 39वीं बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चार क्षेत्र हैं --फुटवियर, कपड़ा, उर्वरक और मोबाइल फोन -- जहां तैयार माल के मुकाबले कच्चे माल के आयात पर ऊंची दर से शुल्क लगाया जाता है। यही वजह है कि ''जीएसटी परिषद की बैठक में मोबाइल फोन और उसके विशिष्ट हिस्सों पर जीएसटी दर को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया गया।" उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों में जहां विपरीत शुल्क व्यवस्था है, यदि जरूरत पड़ती है तो भविष्य की बैठक में उस पर विचार किया जाएगा।

एक अन्य फैसले में हाथ से बनी और मशीन से बनी माचिस की तीली पर जीएसटी दर को तर्क संगत बनाते हुए 12 प्रतिशत करने का फैसला किया गया है। वर्तमान में हस्तनिर्मित तीलियों पर पांच प्रतिशत और मशीन निर्मित पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। अब दोनों पर एक समान 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाएगा। इस मुद्दे पर परिषद की 37वीं बैठक में भी चर्चा हुई थी, लेकिन फैसला नहीं लिया गया था। सीतारमण ने कहा कि विमानों की एमआरओ सेवाओं पर जीएसटी दर में किए गए बदलाव से भारत में इन सेवाओं को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सीतरमण ने कहा कि इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने जीएसटी नेटवर्क की कमियां दूर करने और उसे बेहतर बनाने के लिए बैठक में विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। इसमें नेटवर्क की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए जरूरी हार्डवेयर खरीदने और अधिक कार्यबल की नियुक्ति के बारे में भी बताया गया जिसपर परिषद ने अपनी सहमति जता दी। जीएसटी परिषद को उम्मीद है कि नेटवर्क की बेहतरी के लिए जो भी पहलें की गई हैं उन्हें 31 जुलाई 2020 तक अमल में ला दिया जाएगा। बैठक में ई- चालान और क्यूआर कोड लागू करने की तिथि को एक अक्टूबर 2020 तक आगे बढ़ा दिया गया। इससे पहले यह सुविधा एक अप्रैल से लागू होनी थी। इसके साथ ही ई- वालेट योजना लागू करने की तिथि भी 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दी गई।

जीएसटी काउंसिल बैठक की अहम बातें:

1. इन्फोसिस से जीएसटी नेटवर्क के प्रबंध में अधिक कुशल कर्मचारियों को लगाने, हार्डवेयर की क्षमता बढ़ाने को कहा गया है।
2. जुलाई, 2020 तक इन्फोसिस को एक बेहतर जीएसटीएन प्रणाली सुनिश्चित करनी होगी।
3. मोबाइल फोन, विशेष कलपुर्जों पर जीएसटी की दर 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत की गई।
4. जीएसटी भुगतान में देरी पर एक जुलाई से शुद्ध कर देनदारी पर ब्याज लगेगा।
5. विमानों की रखरखाव, मरम्मत, ओवरहॉल (एमआरओ) सेवाओं पर जीएसटी की दर 18 से घटाकर 5 प्रतिशत की गई।
6. हस्त निर्मित, मशीन से बनी माचिस पर जीएसटी की दर को तर्कसंगत बनाकर 12 प्रतिशत किया गया।
7. दो करोड़ रुपए से कम कारोबार वाली इकाइयों को वित्त वर्ष 2017-18, 2018-19 के लिए वार्षिक रिटर्न भरने में देरी पर विलम्ब-शुल्क माफ।

परिषद की बैठक में जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामले में हो रही धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिये नई पहल को लेकर भी सिफारिश की गई। मुखौटा कंपनियां बनाकर उनके माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी पर लगाम कसने के लिये माल एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद ने नई पंजीकृत इकाइयों को आईटीसी जारी करने से पहले उनके प्रतिष्ठानों और उनके वित्तीय लेनदेन की जानकारी लिए जाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही बैंकों से भी सूचना रिटर्न प्राप्त करने पर भी जोर रहेगा।

जीएसटी भुगतान में देरी होने पर शुद्ध नकद कर देनदारी के आधार पर ब्याज लगाया जाएगा। इसकी गणना एक जुलाई 2017 से की जाएगी। इस संबंध में कानून में पिछली तिथि से जरूरी संशोधन किया जायेगा। कारोबारियों की सुविधा के लिए 14 मार्च 2020 तक निरस्त जीएसटी पंजीकरण को फिर से बहाल करने के लिए 30 जून 2020 तक आवेदन दिया जा सकता है। कारोबार शुरू करने वालों को यह एकबारगी सुविधा दी जाएगी।

पांच करोड़ रुपए से कम सकल कारोबार करने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को 2018- 19 वित्त वर्ष के लिए फार्म जीएसटीआर- 9सी में मिलान विवरण दाखिल करने के मामले में राहत दी जाएगी। वित्त वर्ष 2018- 19 के लिये सालाना रिटर्न और मिलान विवरण दर्ज करने की तिथि 30 जून 2020 तक बढ़ाई जाएगी। इसी प्रकार दो करोड़ रुपए से कम कारोबार करने वाले करदाताओं के लिए 2017- 18 और 2018- 19 की सालाना रिटर्न और लेन- देन मिलान विवरण दाखिल करने पर विलंब शुल्क नहीं लिया जाएगा।

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